
India Gas Supply News : मार्च 2026 में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। विशेष रूप से Strait of Hormuz में बढ़े सैन्य तनाव के कारण कई देशों के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई। इस संकट का असर भारत पर भी पड़ा क्योंकि भारतीय ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है।
हालांकि पिछले कुछ दिनों में भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। कूटनीतिक प्रयासों के बाद ईरान ने भारत के कुछ गैस जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने की अनुमति दी है, जिससे घरेलू गैस आपूर्ति को आंशिक राहत मिलने की उम्मीद है।
तीन भारतीय जहाजों को मिली सुरक्षित निकलने की अनुमति
ईरान ने विशेष अनुमति देकर भारत के तीन बड़े एलपीजी जहाजों को होर्मुज पार करने की मंजूरी दी है। इन जहाजों में बड़ी मात्रा में रसोई गैस भारत लाई जा रही है।
1. VLGC Shivalik
यह जहाज 13 मार्च की रात Strait of Hormuz पार कर चुका है। इसमें लगभग 46,000 मीट्रिक टन LPG लदा हुआ है और इसके 16 मार्च तक Mundra Port पहुंचने की उम्मीद है।
2. Nanda Devi
दूसरे जहाज नंदा देवी को भी अनुमति मिल चुकी है। इसमें भी लगभग 46,000 मीट्रिक टन LPG है और यह 17 मार्च तक Kandla Port पहुंच सकता है।
3. Jag Prakash
तीसरा जहाज जग प्रकाश पहले ही सुरक्षित मार्ग की अनुमति प्राप्त कर चुका था और इसके भी भारत पहुंचने की प्रक्रिया जारी है।
इन जहाजों के आने से देश में रसोई गैस की सप्लाई को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
अभी भी फंसे हैं 22 भारतीय जहाज
भारत के शिपिंग मंत्रालय के अनुसार (14 मार्च 2026 तक) कुल 22 भारतीय जहाज अभी भी Persian Gulf में फंसे हुए हैं और सुरक्षित मार्ग का इंतजार कर रहे हैं।
इन जहाजों का विवरण इस प्रकार है:
6 जहाज LPG (रसोई गैस) के
1 जहाज LNG (प्राकृतिक गैस) का
4 जहाज कच्चे तेल (Crude Oil) के
बाकी जहाज कंटेनर और अन्य सामान के
इन जहाजों पर कुल 611 भारतीय नाविक मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा पर भारत सरकार लगातार नजर बनाए हुए है।
रास्ता बंद क्यों हुआ था ?
हाल के हफ्तों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा है। इस दौरान ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को बंद करने की चेतावनी दी थी।
यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है, इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
भारत को अनुमति कैसे मिली ?
सूत्रों के अनुसार भारत और ईरान के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के बाद यह अनुमति मिली।
Narendra Modi और
Masoud Pezeshkian
के बीच हुई बातचीत के साथ-साथ
Subrahmanyam Jaishankar
के कूटनीतिक प्रयासों के बाद ईरान ने भारत को “मित्र देश” बताते हुए इन गैस जहाजों को सुरक्षित निकलने की अनुमति दी।
भारत पर क्या असर पड़ा ?
होर्मुज संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है।
गैस आपूर्ति प्रभावित होने लगी थी
कई राज्यों में सप्लाई दबाव में आ गई थी
इसी कारण 9 मार्च 2026 को सरकार ने Natural Gas Control Order लागू किया
इस आदेश का उद्देश्य घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता बनाए रखना था।
अब इन तीन जहाजों के आने से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन 22 जहाजों का अभी भी फंसा होना चिंता का विषय बना हुआ है।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। हालांकि भारत के लिए राहत की बात यह है कि कूटनीतिक प्रयासों के कारण कुछ जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल गया है।
फिर भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, क्योंकि कई भारतीय जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगी।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है ?
यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
2. भारत के कितने जहाज अभी भी फंसे हुए हैं ?
ताजा जानकारी के अनुसार लगभग 22 भारतीय जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं।
3. भारत को कितने जहाजों को निकलने की अनुमति मिली ?
अब तक तीन भारतीय गैस जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया गया है।
4. इन जहाजों में क्या सामान है ?
मुख्य रूप से LPG (रसोई गैस), LNG (प्राकृतिक गैस) और कच्चा तेल।
5. क्या भारत में गैस की कमी हो सकती है ?
कुछ समय के लिए सप्लाई पर दबाव देखा गया था, लेकिन नए जहाजों के पहुंचने से स्थिति में राहत मिलने की उम्मीद है।