
Maternity Leave Rules in India : भारत में कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व जीवन का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण है। लेकिन दुर्भाग्य से कई मामलों में महिलाओं को प्रेगनेंसी की जानकारी देने के बाद कार्यस्थल पर दबाव, भेदभाव या नौकरी से निकालने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यह समझना बेहद जरूरी है कि मातृत्व केवल व्यक्तिगत स्थिति नहीं, बल्कि कानूनी रूप से संरक्षित अधिकार है।
यदि किसी महिला कर्मचारी को गर्भावस्था के कारण अवकाश देने से मना किया जाता है, भूमिका बदल दी जाती है, वेतन रोका जाता है या नौकरी समाप्त कर दी जाती है—तो यह केवल अनैतिक आचरण नहीं बल्कि कानून का उल्लंघन हो सकता है। यह लेख आपको विस्तार से बताता है कि संबंधित कानून क्या कहता है, आपके वैधानिक अधिकार क्या हैं और ऐसी स्थिति में आपको किस प्रकार व्यवस्थित तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।
1. कौन सा कानून लागू होता है?
भारत में मातृत्व से जुड़े अधिकारों को मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (संशोधित 2017) के तहत संरक्षित किया गया है। वर्ष 2017 में किए गए महत्वपूर्ण संशोधन के बाद यह कानून और अधिक मजबूत बनाया गया ताकि कामकाजी महिलाओं को पर्याप्त समय और आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
यह अधिनियम उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जहाँ कम से कम 10 कर्मचारी कार्यरत हों। इसमें निजी कंपनियाँ, कॉर्पोरेट संस्थान, फैक्ट्रियाँ, दुकानें और संगठित क्षेत्र के अन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं।
इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्भावस्था और प्रसव के कारण महिला की आय, पद और रोजगार की सुरक्षा प्रभावित न हो।
2. मातृत्व अवकाश कितने समय का मिलता है?
2017 संशोधन के बाद मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाई गई। प्रावधान इस प्रकार हैं:
- पहली और दूसरी संतान के लिए: 26 सप्ताह का सवेतन (Paid) मातृत्व अवकाश
- तीसरी संतान से आगे: 12 सप्ताह का सवेतन अवकाश
- 3 माह से कम आयु के शिशु को गोद लेने वाली महिला: 12 सप्ताह का अवकाश
- सरोगेसी के माध्यम से मां बनने वाली महिला (Commissioning Mother): 12 सप्ताह का अवकाश
इन 26 सप्ताह में से अधिकतम 8 सप्ताह का अवकाश संभावित डिलीवरी से पहले लिया जा सकता है। शेष अवकाश प्रसव के बाद लिया जाता है।
यह अवकाश महिला का कानूनी अधिकार है। कंपनी इसे “कृपा” या “अनुमति” के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकती।
3. मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन और लाभ
कानून के अनुसार, मातृत्व अवकाश के दौरान महिला कर्मचारी को उसका औसत दैनिक वेतन दिया जाना चाहिए, जो पिछले तीन महीनों के वेतन के आधार पर निर्धारित होता है।
साथ ही:
- सेवा निरंतर मानी जाती है
- बोनस, इन्क्रीमेंट या अन्य वैधानिक लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता
- मेडिकल बोनस (यदि कंपनी प्री-नेटल और पोस्ट-नेटल सुविधा उपलब्ध नहीं कराती) देय हो सकता है
4. क्या प्रेगनेंसी के दौरान नौकरी से निकाला जा सकता है?
सामान्य सिद्धांत यह है कि मातृत्व अवकाश लेने या गर्भावस्था के कारण महिला को नौकरी से निकालना अवैध है।
निम्न स्थितियाँ कानून के विरुद्ध हो सकती हैं:
- मातृत्व अवकाश के कारण सेवा समाप्त करना
- अवकाश अवधि में वेतन या लाभ रोकना
- जबरन इस्तीफा देने का दबाव बनाना
- पद, वेतन या जिम्मेदारियों में ऐसा बदलाव करना जिससे कर्मचारी को नुकसान हो
यदि स्पष्ट रूप से यह सिद्ध हो जाए कि बर्खास्तगी का वास्तविक कारण गर्भावस्था है, तो यह अनुचित बर्खास्तगी (Unfair Dismissal) और लैंगिक भेदभाव का मामला बन सकता है।
हालांकि, यदि कंपनी गंभीर कदाचार (Gross Misconduct) के स्पष्ट और प्रमाणित आधार पर कार्रवाई करती है, तो अलग स्थिति हो सकती है। इसलिए प्रत्येक मामले के तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं।
5. ऐसी स्थिति में आप क्या कदम उठाएँ?
(1) औपचारिक लिखित सूचना दें
- कंपनी को ईमेल के माध्यम से सूचित करें कि आप मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत अवकाश ले रही हैं।
- अपेक्षित डिलीवरी तिथि का उल्लेख करें।
- पंजीकृत डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट संलग्न करें।
- HR और रिपोर्टिंग मैनेजर को कॉपी में रखें।
लिखित रिकॉर्ड भविष्य में आपके पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है।
(2) सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें
- नियुक्ति पत्र (Appointment Letter)
- वेतन पर्ची (Salary Slips)
- ईमेल संवाद
- WhatsApp या अन्य चैट के स्क्रीनशॉट
- मेडिकल प्रमाणपत्र
(3) आंतरिक शिकायत तंत्र का उपयोग करें
यदि कंपनी में Internal Complaints Committee (ICC) या HR grievance system है, तो वहाँ लिखित शिकायत दर्ज करें।
(4) बाहरी शिकायत दर्ज करें
यदि कंपनी कार्रवाई न करे या नौकरी समाप्त कर दे, तो आप शिकायत दर्ज कर सकती हैं:
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)
- संबंधित राज्य के श्रम आयुक्त (Labour Commissioner)
इन संस्थाओं के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है और प्रक्रिया सामान्यतः निःशुल्क होती है। आवश्यकता पड़ने पर श्रम न्यायालय का विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है।
6. आम गलतियाँ जो नहीं करनी चाहिए
- केवल मौखिक बातचीत पर भरोसा करना
- अवकाश आवेदन लिखित रूप में न देना
- “अभी प्रोजेक्ट जरूरी है” कहकर लीव टाल देना
- बिना कानूनी सलाह के इस्तीफा दे देना
- दबाव में आकर “वॉलंटरी रेजिग्नेशन” साइन कर देना
ध्यान रखें: यदि आप स्वयं इस्तीफा देती हैं, तो बाद में यह सिद्ध करना कठिन हो सकता है कि आप पर दबाव डाला गया था।
7. क्या यह कानून सभी कर्मचारियों पर लागू होता है?
यह अधिनियम उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जहाँ 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हों। कुछ कर्मचारियों पर कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) अधिनियम लागू हो सकता है, जहाँ मातृत्व लाभ ESI के माध्यम से प्रदान किया जाता है।
पात्रता के लिए सामान्यतः आवश्यक है कि कर्मचारी ने संभावित डिलीवरी तिथि से पूर्व 12 महीनों में कम से कम 80 दिन कार्य किया हो।
इसलिए अपनी कंपनी की नीति, नियुक्ति शर्तें और लागू सामाजिक सुरक्षा कानूनों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
8. कार्यस्थल पर सम्मान और समान अवसर का अधिकार
भारतीय संविधान समानता का अधिकार देता है। कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ केवल उनकी जैविक स्थिति के आधार पर भेदभाव करना समानता के सिद्धांत के विपरीत है।
कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे:
- सुरक्षित और सहयोगी कार्य वातावरण प्रदान करें
- मातृत्व को करियर बाधा के रूप में न देखें
- नीतियों को पारदर्शी और कानून अनुरूप रखें
निष्कर्ष
मां बनना किसी भी महिला के करियर के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए। मातृत्व लाभ कानून द्वारा संरक्षित एक वैधानिक अधिकार है, जिसे न तो टाला जा सकता है और न ही मनमाने ढंग से रोका जा सकता है।
यदि आपके साथ अन्याय हो रहा है, तो शांत और व्यवस्थित तरीके से कार्रवाई करें। लिखित रिकॉर्ड रखें, औपचारिक संचार करें और आवश्यकता पड़ने पर वैधानिक संस्थाओं से संपर्क करें। जागरूकता और सही जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. क्या निजी कंपनी भी 26 सप्ताह की पेड लीव देने के लिए बाध्य है?
हाँ, यदि कंपनी में 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं और आप पात्रता शर्तें पूरी करती हैं, तो मातृत्व लाभ अधिनियम लागू होता है।
Q2. क्या कंपनी प्रेगनेंसी के दौरान प्रदर्शन (Performance) का बहाना बनाकर निकाल सकती है?
यदि प्रदर्शन के आधार पर कार्रवाई वास्तविक और दस्तावेज़ित हो, तो स्थिति अलग हो सकती है। लेकिन यदि वास्तविक कारण गर्भावस्था है, तो इसे कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है।
Q3. क्या प्रोबेशन पीरियड में भी मातृत्व लाभ मिलता है?
हाँ, यदि आपने निर्धारित 80 दिनों का कार्य पूरा किया है, तो प्रोबेशन अवधि में भी आप लाभ की पात्र हो सकती हैं।
Q4. क्या मातृत्व अवकाश के दौरान इन्क्रीमेंट या प्रमोशन रुक सकता है?
कानून के अनुसार केवल अवकाश लेने के कारण आपके वैधानिक लाभ रोके नहीं जाने चाहिए। तथ्यों के आधार पर मामला भिन्न हो सकता है।
Q5. शिकायत कहाँ और कैसे दर्ज करें?
आप राष्ट्रीय महिला आयोग या राज्य श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकती हैं। आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना महत्वपूर्ण है।
Q6. क्या मौखिक रूप से लीव बताना पर्याप्त है?
नहीं। हमेशा लिखित (ईमेल) में सूचना दें और उसकी कॉपी सुरक्षित रखें।
Q7. क्या कंपनी मुझे अवकाश के दौरान किसी अन्य भूमिका में ट्रांसफर कर सकती है?
यदि बदलाव आपके हित के विरुद्ध है या मातृत्व के कारण किया गया है, तो इसे चुनौती दी जा सकती है। तथ्यों के आधार पर कानूनी सलाह लेना उचित होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रत्येक मामला तथ्यों पर निर्भर करता है। किसी विशिष्ट परिस्थिति में श्रम कानून विशेषज्ञ या योग्य अधिवक्ता से परामर्श लेना उचित रहेगा।